छत्तीसगढ़ी कहावतें। cg kahavat - हमर गांव

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Monday, 4 December 2017

छत्तीसगढ़ी कहावतें। cg kahavat

 कभी-कभी किसी बात को कहने के लिए लोगों द्वारा एक प्रकार के छोटे और सटीक शब्दों का प्रयोग किया जाता है जिसे कहावत कहा जाता है।
कहावत एक कैप्सूल की तरह होता है जिस प्रकार कैप्सूल में बहुत सी असरदार चीजें बहुत छोटी जगह में भरी होती है ,ठीक उसी प्रकार कहावत में किसी भी बात को कम से कम शब्दों में कहा जाता है।  ये कहावतें आदि काल से पीढ़ी दर पीढ़ी हस्तांतरित होते आ रहा है।


 हमने कुछ कहावतों और उसके अर्थ को बताने का प्रयास किया है, यदि आप लोगों को लगता है कि,किसी भी कहावत का अर्थ  कुछ और हो सकता है तो कमेंट बॉक्स में जरूर कमेंट  करें।


नीचे कुछ कहावतों,लोकोक्तियों को अर्थ सहित दिया गया है-






1.लबरा के नौ नागर=सफेद झूठ।

2.करिया आखर भईस बरोबर=अनपढ़ होना।

3.दूसर बर खाँचा खनय खुदय धसका लय=किसी के लिए 
बुरा सोचना।

4.काजर के कोठरी म घुसबे त दाग तो लगहिच चे=किसी काम मे शामिल रहना।

5.मोरे बिलई मोरे से म्याऊ=बहस करना।

6.खुल्ला बदन नहावय त निचोवय का=परिणाम का चिंता न करना।

7. सरहा मुड़ नाउ ल दोष=खुद की गलती दूसरे को दोष देना।



8.बनती त बनती नही त खनती= गलती पर परिणाम भुगतना।

9.फोकट के पाईस त मरत ले खाइस=किसी चीज का महत्व न समझना।

10.दु दिन के पहुना=जल्दी चले जाना।

11.उजड़े मड़वा म डीड़वा नाच=काम होने के बाद चुस्ती दिखाना।

12.अपन हाथ के खिला टाइट करले चाहे ढीला=स्वयं का नियंत्रण होना।

13.अपन हाथ जगन्नाथ= साधन संपन्न ।

14.गुड़ गड़ेरी आन खाय टुकना बपुरा मार खाय=फायदा किसी का और दिम्मेदारी दूसरे का।

15.आंजत आंजत आखि ल फोर डरीच=गलती होना।

16.अपन मरे म सरग दिखथे=विपत्ति का सामना स्वयं करना।

17.मरहा ल दु आषाढ़=विपत्ति आना।

18.तेली के घर म तेल हे त पहाड़ ल नई फोत डारै=दुरपयोग करना।

19.सौ बार सोनार के त एक बार लोहार के =करारा जवाब देना।

10.कथरी ओढ़ के घीव खाना=अंदर ही अंदर फायदा कमाना।

11.नही मम से कनवा मम अच्छा=कुछ नही होने से अच्छा है, कुछ तो है।

12.महि मांगे जाय अउ ठेकवा ल लुकाय=संकोच करना।

13.जादा के मिठास म किरा लगथे=ज्यादा नजदीकी ठीक नही होती है ।

14.गरियार बइला=काम चोरी करना।

15.घानी कस बइला गोल गोल घूमना=गुमराह होना।

16.अंधरा बर का दिन त का रात=कुछ भी फायदा न होना।

17.हरियर खेती गाभिन गाय जबे खाय तभे पतियाय=पा न लें तब तक यकीन न करना।

18.आखीं वाले अंधरा=जानबूझ कर गलती करना।

19.जरे म नमक छिचई=दुखी को और कष्ट पहुंचना।

20.मरत ल अउ मार डरय=मदद न करना।

21.परदेश के जवई त रुख के चढ़ई =देखने मे आसान लगना।

22.भागे मछरी जाँघ कस मोटह=जो चीज हमें नही मिलता वह मूल्यवान होता है।

23.अंधरा खोजय दु आँखी=मनचाहा वस्तु प्राप्त होना।
यहाँ पर हमने प्रयास किया है कि छत्तीसगढ़ में जो कहावतें लोगो के द्वारा कही जाती है उसे आप लोगों तक पहुंचाने का।यदि आप लोगों को छत्तीसगढ़ी कहावत पता हो तो कमेंट बॉक्स के माध्यम से हमसे  शेयर कर सकते हैं दोस्तों कमेंट के माध्यम से जरूर बनाता कि यह जानकारी आपको कैसा लगा।धन्यवाद

6 comments:

  1. Please answer me - karni dikhe Marni ke ber' what is the meaning of the proverb?

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  2. किसी समस्या से घिरने पर खुद के द्वारा किये गए गलत कार्यों का एहसास होना।

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