छत्तीसगढ़ी कहानी-मेचका । chhattisgarhi kahani - हमर गांव

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Sunday, 31 December 2017

छत्तीसगढ़ी कहानी-मेचका । chhattisgarhi kahani








Chhattisgarh में किसी को उदाहरण के माध्यम से कुछ समझाना हो या किसी को प्रेरणा देना हो तो लोग छत्तीसगढ़ी कहानी को उदाहरण के रूप में अवश्य प्रस्तुत करते हैं।इसके अलावा chhattisgarhi कहानी का महत्व ,इस बात से भी लगाया जा सकता है कि छत्तीसगढ़ी कहानी को बच्चों के पाठ्यक्रम में शामिल किया जा चुका है।


                                मेचका


एक बार दुठन मेचका मन घूमें बर निकले रहैं।दुनों झन एति-ओती ल देखत कूदत कूदत जात रहयँ ,अचानक उंखर आघू म एक बड़े असन गड्ढा आ जथे। दुनों झन बचे बर करथें तभो ले दुनो झन ओ गड्ढा म गिर जथें।

दुनो झन ओ गड्ढा ले निकले बर ऊपर कोती बहुत उछलथें। थोरेच देरी के बाद म चिल्लाईन त उंखर आवाज ल सुन के आसपास के सब मेचका मन उंखर मेर आ जथें अउ उमन ल बहुत मना करथें कि मत कुदौ नई निकल पावव ।बहुत समझाईन बहुत गड्ढा हे बेकार के ताकत मत लगावव।


एक मेचका ह उंखर गोठ ल सुन के कूदे ल बन्द कर देथे, फेर दूसर मेचका ह कूदे ल बन्द नई करिच बार बार खुदय अउ उहें गिर जय।ओला लगय के एकात बार गड्ढा म ओरमे जरी ल पकड़ लेहुँ त निकल सकत हौं।


सब मेचका बहुत मना करिन फेर वो ह कूदे ल बन्द नई करीस सब ओला देख के अचंभा होगें।कोनो ल समझ नई आईच ।अटका मना करे के बाद भी ए ह कूदे ल नई छोड़त ए।



बार बार कूदईच करिच अउ ओह बाहर निकल गे ।जेन ह सब के बात ल सुन के चुप बइठ गे तेन मेचका ह गड्ढा म ही रहिगे।
बाद म पता चलिस जेन मेचका ह मना करे के बाद भी बार बार कूदत रहय अउ गड्ढा ले बाहर आगे तेन ह भैरा रहय।


इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि यदि आप किसी  लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए जब भी कदम बढ़ाओगे लोग हमेशा आपको को टोकेंगे कि आप ऐसा नही कर पाओगे ।परन्तु हमें बहरे मेढक की तरह कान बन्द कर अपने लक्ष्य प्राप्ति तक किसी के बातों से भ्रमित हुए बिना ही अपने काबिलियत पर भरोसा करते हुए प्रयत्न करना चाहिए।

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