छत्तीसगढ़ के लोक नृत्य- पंथी । chhattisgarhi lok nrity panthi - हमर गांव

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Saturday, 23 December 2017

छत्तीसगढ़ के लोक नृत्य- पंथी । chhattisgarhi lok nrity panthi



 पंथी नृत्य छत्तीसगढ़ के सतनामी समुदाय के लोगो द्वारा किये जाने वाला नृत्य है ।इस नृत्य मे गुरु घासीदास जी के जीवन चरित्र का मनमोहक वर्णन किया जाता है। यह नृत्य दिसम्बर माह के 18 तारीख से शुरू होता है जो कि परम् पूज्य गुरु घासीदास बाबा का जन्म दिवस है।इसी दिन जैतखाम में झंडा रोहण किया जाता है। यह एक समूह नृत्य है। जिसमें वाद्य यंत्र बजाने वाले और नाचने वाले को मिलाकर 15 से 25 या अधिक सदस्य हो सकते हैं।यह नृत्य बाबा गुरु घासीदास के जन्म उत्सव के रूप में शुरू हुआ था।


इतिहास-
महासमुंद जिले के रहने वाले श्री नकुल ढ़ीड़ही ने सर्वप्रथम 1935 में पंथी नृत्य को प्रारम्भ किया था।तब से आज तक पंथी नृत्य अनवरत रूप से किया जाता रहा है।

वेशभूषा-
पंथी नृत्य करने वाले सभी सदस्य एक ही प्रकार के वस्त्र धारण किये रहते हैं।शर्ट, बनियान या कमर से ऊपर खुला बदन रहता है।कमर से नीचे स्वेत रंग का धोती धारण किये रहते हैं।पैर में घुँघरू बंधा होता है।

विशेषताएं-
पंथी नृत्य का अलग ही महत्व या विशेषता है यह एक समूह नृत्य है।पंथी नृत्य में मांदर(मृदंग) का विशेष महत्व है।झांझ, मंजीरा, झुमका बैठ पार्टी में बेंजो का होना आवश्यक है।इस नृत्य का गायन पूर्णतः गुरु घासीदास जी के जीवन पर आधारित होता है।बाबा जी के उपदेशों का बखान किया जाता है।
          
पंथी नृत्य दो प्रकार का होता है -
1.बैठ पार्टी-

इस नृत्य में वाद्य यंत्र बजाने वाले बैठ कर वाद्य यंत्रों को बजाते हैं।नाचने वाले इनके चारोओर घूमते हुए नृत्य करते हैं ।इस नृत्य में करतब नही दिखाया जाता है।बैठ पार्टी में दो व्यक्ति गाने वाले होते हैं जिसमे एक गाता है दूसरा दुहराता है इन्हें क्रमशः पंडित और रागी कहा जाता है।

2.खड़ी पार्टी-


खड़ी पार्टी में वादक खड़े होकर नाचते हुए वाद्य यंत्रों को बजाते हैं।खड़ी पार्टी वाले में एक व्यक्ति नाचते हुए गाता है बाकी उसे दुहराते हैं।खड़ी पार्टी में करतब दिखाया जाता है।


पंथी गीत-


जाएके बेरा काम आहि जी... ,ए जाएके बेरा काम आहि न 2।
तै तो हिरदे म सुमरले सतनाम , जाएके बेरा काम आहि न ।
एक झन साथी तोर घर कर नारी... घर कर नारी..2.,
मरे के बेरा ओह दूसरे बनाही... दूसरे बनाही.......2।
घर कर नारी ...घर कर नारी......,

दूसरे बनाही ....दूसरे बनाही.....
तै तो हिरदे म सुमरले सतनाम ,जाएके बेरा  आहि न। 



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