छत्तीसगढ़ी कहानी-बोकरी अउ भेड़िया । Cg kahani-bokri au bhediya - हमर गांव

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Saturday, 17 February 2018

छत्तीसगढ़ी कहानी-बोकरी अउ भेड़िया । Cg kahani-bokri au bhediya



Chhattisgarh में कहानी कहने और सुनने की परंपरा बहुत ही पुरानी है।लोग आदि काल से कहानी सुनाते और सुनते आ रहे हैं ।आप सबको याद होगा शाम होते ही दादा जी के चारोओर बैठ कर मजेदार कहानी सुनते थे।आप लोगों के बचपन की याद ताजा करने के लिए प्रस्तुत है chhttisgarhi कहानी-बोकरी अउ भेड़िया।



बोकरी अउ भेड़िया


एक गॉव म एक डोकरी रहय ओ ह एक ठन बोकरी पाले रहय।डोकरी ह बोकरी ल रोज चारा चरे बर ढील दै।बोकरी रोज दूसर के बारी-कोला म जा के उजार करे लगिच। सब डोकरी ल बद्दी दे लगिन।डोकरी ह रोज के बद्दी ल सुन सुन के तंगागे।डोकरी ह बोकरी ल जंगल म छोड़ के आ गे।
बोकरी जंगल म एक माड़ा म रहे लगिस।कुछ दिन बाद ओ ह तीन ठन पिलवा ल जनम दिच।बोकरी रोज चारा चरे बर दुरिहा जाय।पिलवा मन भीतर ले दरवाजा ल बन्द कर लैं।जब बोकरी चारा ले के आवय अउ दरवाजा में आ के काहय-
बोकरी माई मैं आए हौं हरियर चारा मैं लाए हौं....।



त एतका बात ल सुन के पिलवा मन  दरवाजा ल खोल दैं। बोकरी के लाए चारा ल खा लेवयँ।
एक दिन एक भेड़िया घूमत-घूमत जात रहय।भेड़िया ह बोकरी ल देखिस त रुक गै अउ बोकरी के माड़ा के तिर म लुकाके उंखर बात ल सुने लगिस।बोकरी चारा ले के आइस अउ दुवारी मेर आके कहे लगिस-"बोकरी माई मैं आए हौं हरियर चारा लाए हौं।" बोकरी के पिलवा मन कपाट ल खोल दीन अउ बोकरी के लाय चारा ल कहा लिन।ये सब ल देख के भेड़िया बोकरी के पिलवा मन ल खाए बर सोचे लगिस ।
बोकरी जब चारा लाए बर गिच तेखर बाद भेड़िया ह बोकरी के माड़ा के दुवारी मेर आके कहिथे-
बोकरी माई मैं आए हौं हरियर चारा मैं लाए हौं....।



पिलवा मन ल भेड़िया के आवाज ह अलग लगिस त मन ल शक होगे।पिलवा मन कहिथें अपन हाथ ल कपाट के छेद मेर ले देखा तभे कपाट ल खोलबो ।भेड़िया कपाट के छेद मेर ले हाथ ल दिखाई त ओखर करिया रंग ल देख के पिलवा मन कपाट ल नई खोलिन।
भेड़िया अब का करय ? कुछ सोचिच अउ तिर म लगे गॉव म जा के पिसान ल हाथ म लपेट के आ गे। पिसान के सेती ओखर हाथ ह सादा सादा दिखे लगिच अब फेर माड़ा मेर आके कहिथे-

बोकरी माई मैं आए हौं हरियर चारा मैं लाए हौं.....।
पिलवा मन कहिथे अपन हाथ ल देखा तभे  कपाट ल खोलबो। भेड़िया ह पिसान लगे हाथ ल देखा दिस ।पिलवा मन जइसे दरवाजा ल खोलिन भेड़िया ह पिलवा मन ल खालिस।अउ दुरिहा जंगल म जा के सो गे।
बोकरी जब चारा ले के आइस त कोनो पिलवा ल नई पाई।बहुत खोजिस एक पिलवा जेन ह ओधा म सो गए रहय तेन ह बच गे रहय ओ ह अपन दाई ल सब बात ल बताइच ।

बोकरी अपन दुनों सिंघ ल पथरा म कस के धार करिच अउ भेड़िया ले लड़े बर चल दिच दुनो म खूब लड़ाई होइच बोकरी ह भेड़िया के पेट ल चिर दिच भेड़िया मर गे। सब पिलवा मन भेड़िया के पेट ले निकल गे।बोकरी पिलवा मन ल ले के अपन माड़ा म आगे।

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इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि कोई कितना भी कमजोर क्यों न हो यदि आत्म बल और अपनों के जान पर बन आया हो तो किसी का भी सामना  सकता है।चाहे सामने वाला कितना भी ताकतवर क्यों न हो।

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