छत्तीसगढ़ी कविता-गोहार। cg poem - हमर गांव

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Friday, 16 March 2018

छत्तीसगढ़ी कविता-गोहार। cg poem

आज पूरा देश" बेटी बचाओ ,बेटी पढ़ाओ" के इस श्लोगन को पूरा करने के दिशा में  कार्य कर रहा है ।लोगों से जैसा बन पा रहा है ,जैसे पेंटर अपने  पेंटिंग के द्वारा, कवि अपने कविता के माध्यम से बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के इस आंदोलन को आगे बढ़ाने के दिशा में कार्य कर रहे हैं । इस camping में मेरे द्वारा कविता के माध्यम से छोटा सा सन्देश देने का प्रयास किया गया है।

दोस्तों छत्तीसगढ़ी में प्रस्तुत है बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का संदेश देती यह कविता।



                   गोहार


महुँ जाहूं पढ़े बर,जिनगी ल गढ़े बर।
दुनिया के संगे संग, आघू महुँ बढ़े बर।।

सुनें हंवा गुरुजी नाच नाच के पढ़ाथे।
सब्बो संगी बतावत रहीन बड़ा मजा आथे।।
स्कूल के मजा पाए बर, नया परम्परा चलाए बर......

महुँ जाहूं पढ़े बर ,जिनगी ल गढ़े बर.....

स्कूल म मैं पढ़िहौ लिखिहौ अक्षर ज्ञान ल पाहौं।
भूख कहूँ लगही त मधियान भोजन म खाहौं।।
पोस्टिक भोजन खाए बर, गियान के जोत जलाए बर ...

महुँ जाहूं पढ़े बर ,जिनगी ल गढ़े बर।
दुनिया के संगे संग आघू महू बढ़े बर।।

भईया के संग म जाहूं अउ भईया के संग म आहूं।

मोर ऊपर तुंहर करे करम ल कभु नई भूलाहूँ।।
मोरो जिनगी सँवारे बर ,दु कुल के मान बढ़ाए बर......

महुँ जाहूं पढ़े बर ,जिनगी ल गढ़े बर।

दुनिया के संगे संग ,आघू महू बढ़े बर।।


इसे भी पढें- 1.छत्तीसगढ़ी कविता'नानपन के मोर गॉव'


                  2. छत्तीसगढ़ी कविता'गुणवत्ता वर्ष'


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4 comments:

  1. बहुत बढ़िया कविता है
    इसको मधुर स्वर में गया कर यूट्यूब में अपलोड करने का कृपा करें

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