ग्राम पंचायत के अधिकार एवं कर्तब्य।grampanchayat ke adhikar avm kartavya



राष्ट्र पिता महात्मा गॉंधी ने आजादी के पश्चात जिस स्वर्णिम भारत की कल्पना की थी उनमे से एक था पंचायती राज व्यवस्था की स्थापना।गांधी जी चाहते थे कि स्थानीय निकाय इतने सशक्त हो जाएं कि ग्राम स्तर पर ही सारी समस्याओं का निदान किया जा सके ।गांधी जी के इसी दूरदर्शी सोच का ही परिणाम है कि पंचायती राज व्यवस्था इतनी सुदृण और सशक्त है।

पंचायती राज व्यवस्था के अंतर्गत पंचायतों को सशक्त बनाने बहुत सारे अधिकार संविधान द्वारा दिया गया है।ग्राम पंचायत संविधान द्वारा प्रदत्त इन्ही अधिकारों का प्रयोग कर विभिन्न प्रकार के कार्य करता है-

1.स्वच्छता सम्बन्धी कार्य तथा अपशिष्ट का समुचित निपटान।

2.सार्वजनिक तालाबों, कुओं का निर्माण,मरम्मत और संरक्षण करना।

3.पीने की पानी,नहाने,और पशुओं के पीने की पानी तथा उसके स्त्रोतों की रखरखाव व निर्माण करना।

4.सड़को,तथा अन्य सार्वजनिक  जगहों पर प्रकाश की व्यवस्था करना।

5.सड़कों ,पुलियों,बांधों, नालियों का निर्माण व साफसफाई करना।

6.ग्राम पंचायत के सम्पत्ती की सुरक्षा करना।

7.मनोरंजन,खेलों,दुकानों,भोजन गृहों, फल ,मिठाई तथा अन्य वस्तुओं का विनियमन करना और नियंत्रण करना।

8.कचरा डम्प करने की स्थानों की व्यवस्था करना ।



9.काँजी हाउस का निर्माण,रखरखाव,पशुओं से सम्बंधित अभिलेखों का रखरखाव।

10.बाजारों,मेलों की स्थापना,प्रबन्धन और विनियमन करना।

11.जन्म, मृत्यु तथा विवाहों का रिकार्ड रखना।

12.रोगों के रोकथाम के उपाय करना।

13.शासन द्वारा लागू किये गए योजनाओं का क्रियान्वयन करना।

14.निर्बलों व निराश्रितों की सहायता करना।

15.युवा कल्याण,परिवार कल्याण के कार्य करना।

17.वृक्षारोपण तथा पेंड़ पौधों को कटने से बचाना।

18.समाज मे प्रचलित कुरीतियों को दूर करना।

19.लोगों को शिक्षा ,स्वास्थ्य के लिए स्कूल स्वास्थ्य केन्द्र का निर्माण करना।

20.सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत उचित मूल्य की दुकान की स्थापना, निगरानी करना।

21.ग्राम सभा मे पास किए गए अनुशंसाओं को लागू करना।

22.स्थानीय संसाधनों का व्यय व नियंत्रण करना।

23.केंद्र, राज्य, जिला,जनपद द्वारा सौपे गए परियोजनाओं का निष्पादन करना।


इसके अतिरिक्त  और कई कार्य हैं जिसे ग्राम पंचायत द्वारा किया  जाता है।

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