छत्तीसगढ़ी कहानी -समधी अउ कोर्रा।chhattisgarhi kahani-samadhi au korea - हमर गांव

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Thursday, 24 May 2018

छत्तीसगढ़ी कहानी -समधी अउ कोर्रा।chhattisgarhi kahani-samadhi au korea



Chhattisgarh में chhattisgarhi  शिक्षाप्रद कहानी सुनने को तो मिलता ही है ,पर कुछ कहानियाँ हंसी से भरपूर होती है। पहले गॉंव में जो गम्मत होती थी उसमें ऐसे ही हंसी से भरपूर कहानियों पर नाटक का मंचन किया जाता था।

इस कहानी में ग्रामीण परिवेश का सुंदर चित्रण है।किसान परिवार में जो समान्यतः देखने को मिलता है कि किसान को उसके बैल सबसे प्यारे होते हैं।बैल का नाम रखा होता है ।एक का नाम समधी और दूसरे का कोर्रा।

दोस्तों आप सब के लिए प्रस्तुत है ऐसे ही हंसी से भरपूर कहानी-समधी अउ कोर्रा।




एक गांव म एक गरीब किसान रहय ।किसान के एके झन बेटा रहय। किसान मन पति पत्नी अउ ओखर बेटा तीनों मिलके  एक छोटकन घर म रहयं।

किसान मेर दु ठन बइला रहय जेमा एक के नाव समधी अउ दूसर के नाव कोर्रा रहय ।किसान ह दुनों बइला के भरोसा म खेती किसानी करै।

किसान के बेटा ह बालिग  होइस त ओखर बर सुंदर लड़की ल देखके शादी कर देथे। अब सब कोनों बढ़िया से कमावत खात रथें।



कुछ दिन बीते के बाद किसान के लईका के ससुर ह बेटी ल देखे ल जाए बर सोचिंस। अपन बाई ल कहिथे कुछू होती त रोटी-पीठा झोला म  जोर देते ओ , बेटी ल देख के आ जातेवं।ओखर बाई ह अपन बेटी बर बढ़िया रोटी-पीठा बना के झोला म जोर देथे।


ओ आदमी ह झोला ल धर के बेटी के घर बर निकल जथे।कुछ समय के बाद बेटी- दमांद के घर पहुंच जथे। ओखर बेटी ह बढ़िया गोड़ धोये बर पानी देथे अउ बइठे बर बढ़िया खटिया निकाल देथे।



 ओ आदमी ह थोरेच कन बइठे ल पाय रथे  तइसने किसान ह नागर जोत के घर आत रथे, जइसे घर मेर पहुँचथे कोर्रा नाव के बइला ह अन्ते भाग  जथे अउ समधी ह घर म ओलिहा जथे।



कोर्रा के भगई ल देख के किसान ह जोर से अपन बाई ल चिल्लाथे समधी के गरा ल गेरवा म लपेट के खूंटा म बांध के रखबे  मैं कोर्रा ल लावत हौं।


ओखर बात ल सुन के किसान के समधी ह हड़बड़ा के  जम्मो बात ल अपन ऊपर ले लेथे अउ सोंचथे । समधी ल खुटा म बांध के रख कोर्रा ल लावत हौं कहिथे । खूंटा म बांध के  मारय मत कहिके जोर से डरा जथे अउ समधी ह मोला गेरवा म बांध के कोर्रा म मारही कहिके  अपन बेटी के घर ले चुपचाप भागत रहिथे।



ओखर बेटी ह बहुत रोकथे बाबू काबर जात हस। का गलती होगे तोर समधी मेर मिल ले। कोर्रा ल लेके आवत हे।अब तो अपन बेटी के बात ल सुन के अउ एक मिनट नई रुकय भाग जथे।



☺️☺️मोर कहानी पुरगे दार भात चुरगे ।☺️☺️
☺️☺️खावव अउ अपन काम म लग जावव।।☺️☺️


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इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि किसी भी सुनी सुनाई  बात पर विश्वास नही करना चाहिए।हो सकता है ओ बात किसी और तारतम्य में कही गई हो।इस लिए हमेशा धीरज के साथ मनन करने के पश्चात ही निर्णय लिया जाना चाहिए।



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