छत्तीसगढ़ी कहानी -गुडुक। Chhattisgarhi kahani-guduk. - हमर गांव

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Wednesday, 23 May 2018

छत्तीसगढ़ी कहानी -गुडुक। Chhattisgarhi kahani-guduk.





Chhattisgarh एक ऐसा राज्य है जहां पर हर एक बात को सिद्ध करने लिए उदाहरण प्रस्तुत किया जा सकता है। यहां के लोगों को आप बात-बात पर उदाहरण देते देख सकते हैं।chhattisgarh की बोली chhattisgarhi ऐसा मधुर बोली है कि आप सुनकर मोहित हो जाएंगे ।यहाँ की बोली ही यहाँ के लोगों को अलग पहचान देती है।



जिस Chhattisgarhi कहानी को हम प्रस्तुत करने जा रहे हैं वह बहुत ही मार्मिक है।यह एक ऐसे व्यक्ति की कहानी जो अपने कुत्ते से पहुत प्यार करता है।कुत्ता भी अपने मालिक को भगवान से वापस जीवित करने के लिए मजबूर कर देता है।



                                    गुडुक




   बहुत दिन के बात ए। एक गांव म सात भाई रहयँ।सातो भाई एक छोटे कब कुरिया म रहयँ अउ छोटे भाई ल छोड़ के सब्बो झन काम बुता करे ल जांय।उंखर छोटे भाई के गुडुक नाव रहय।

गुडुक ह रोज सब्बो भाई मन बर बोरे बासी ल धर के जाय ।बोरे बासी ल खा के सब झन कमाकूद के आवयं।सब के बढ़िया दिन कटत रहय फेर एक दिन उंखर सुनता म सेंध परगे। काबर ओ दिन ओखर छोटे भाई ह बोरे-बासी पहुंचाय ल जात रहय त रसता म एक ठन कुकुर के पिलवा मिलगे।ओला ओ ह घर ले आगे ।


फेर ओ दिन ले उंखर छोटे भाई ह ,सबो झन बर जब बोरे-बासी धर के जाय त रसता म पेंड़ के छांव म बइठ के बोरे-बासी म के जम्मो सीथा ल झोल -झोल के कुकुर ल खवा देवय। अउ पसई भर ल धर के भइया मन बर पहुंचा देवय।

सबो भाई अपन छोटे भाई ल पूँछय कइसे भाई बासी म एक्को दाना नई हे।छोटे भाई कहि देवय ओइसने जोरे हावयं त मैं का करौं।

कुछ दिन तक अइसने चलिच फेर छयो भाई मन ल गुडुक के ऊपर शक होय लगिच ।काबर छोटे भाई के कुकुर ह मोटाय लगिच।




एक दिन कथे अइसने म तो नई बनय त जब गुडुक ह बासी लेके आहि त रसता म का करथे तेला देखना हे।सब्बो भाई मन सुनता होगें।


गुडुक जब बासी धर के घर ले निकलीच त एक भाई ओखर पाछु पाछु ओला पासत-पासत गिच ।रसता म देखथे के रोज के जइसे गुडुक ह सब सीथा ल झोल के कुकुर ल खवात रहय ।


जेन भाई ओला पासत रहय तेन ह सब बात ल आके अपन अउ भाई मन ल बताइच।सब्बो भाई मन ल बहुत गुस्सा आईच अउ ओला मारे बर सोच डरीन।

फेर गुडुक जइसे खेत पहुचीच सब्बो भाई एक ठन माड़ा ल चारो कोती ले घेर लीन ।गुडुक जइसे तीर म जाके पुछिच काय खोजत हौ भईया? सब्बो झन कहिन भीतर म भठइला घुसरे हे फेर बाहर नई निकलत ए। आज के साग बर हो जातिच।


गुडुक कहिथे लेवा मैं ह माड़ा म घुसरत हौं तू मन बाहिर ले घेरहु ।एतका कहिके जइसे माड़ा म घुसरिच। माड़ा के दुवारी म पैरा ल भर के आगी लगादिन।


गुडुक मरगे सब भाई घर चलदीन घर म दाई पुछिच, गुडुक कहाँ हे बेटा त सब कहिथें ओ तो आघुच के घर आ गे हे।

ए कोती गुडुक के कुकुर ह आगी बुझे के बाद गुडुक के सब हड्डी ल एकट्ठा करके खूब रोइच ।काबर अपन मालिक ले ओला भारी मया होगे रहय।कुकुर के रोवई म भगवान के आसन डोले लगिच ।भगवान कुकुर के रोना ल सुन के परगट होगे।भगवान समझगे जब तक एला नई जियाहुँ ये ह चुप नई होवय कहिके गुडुक ल जिया दिच।जिया के ओला बहुत सारा बरदान दिच।

गुडुक अपन गॉव के तीर म एक गॉव रहय तिहां रहे लगिच ।भगवान के बरदान म बड़े आदमी बनगे।गुडुक अउ ओखर कुकुर बढ़िहा जीवन जिये लगिन।



एकोति गुडुक के भाई मन अउ गरीब होगे अउ भीख मांगे ल धर लीन।काबर अकाल पड़िस त एक्को बीजा धान-पान नई होइस।घर म खाय कुछु नई रहिगे।

एक दिन सब्बो भाई भीख मांगत-मांगत गुडुक के घर म पहुंच गे फेर कोनो गुडुक ल नई पहिचानीन फेर गुडुक ह सब्बो झन ल पहिचान गे।अपन भाई मन के ए दशा ल देख के गुडुक अपन आंसू ल नई रोक पाइस।ओखर रोवई ल देख के सब्बो भाई पूछथें,तैं कोन अस काबर रोवत हस।

गुडुक सब बात ल अपन भाई मन ल बताइच फेर सब एक दूसर ल पोटार के खूब रोइन अउ सब गुडुक के घर म एक संग रहे लागिन।

☺️मोर काहनी पुरगे दार भात चूरगे जावा खाहौ।☺️


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