छत्तीसगढ़ी कहानी-करनी के फल। cg kahani-karni ke fal - हमर गांव

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Friday, 20 July 2018

छत्तीसगढ़ी कहानी-करनी के फल। cg kahani-karni ke fal



कहानी एक ऐसी विधा है जो  बच्चे,जवान,बूढ़े सभी को पसन्द होता है।कहानी सुनानेवाले को तो आनंद आता ही है ,पर कहानी सुनने वालों को उससे भी ज्यादा आनंद आता हैं।

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छत्तीसगढ़ी कहानी के क्रम में प्रस्तुत है एक और कहानी जिसका नाम है-करनी के फल।




एक बार के बात ए। जंगल के एक पेंड़ म बहुत कन चिड़िया मन एक साथ रहयं।अचानक ओ जंगल म आगी लग गे ।सब चिड़िया मन अपन जान बचाके उँहा ले भाग गिन।उड़त उड़त एक राजा के राज म पहुंच गें,फेर सब सोचिन सब मिल के एक पेंड़ लगाथन अउ फेर ओमा रहिबो।




सब चिड़िया मिल के एक  पेंड़ लगाइन कुछ दिन बाद पेंड़  ह बाढ़ गे।सब चिड़िया मिल के रहे लगिन।सब झन पेड़ म बने अपन- अपन खोंधरा म रहैं।


 सबो चिड़िया मन बढ़िया रहयँ, फेर एक दिन एक कऊँआ उड़त उड़त आइस अउ ओ पेंड़ म बइठ गे। सब्बो चिड़िया मन सोचिन थके आय होही कहिके कुच्छु नई बोलिन अउ कऊंआ ल आराम करन दीन।




थोरकन आराम करे के बाद कऊँआ ह कहिथे- महू ल एक तीर म रहे बर जघा दे देतेव त, महुँ तुंहर संग म रहिलेतेंव।मोर कोनो नई ए, कहाँ जाहूं।




कऊँआ के बात ल सुन के चिड़िया मन ल दया आ जाथे अउ कऊंआ ल पेड़ म रहे बर जघा दे देथें।




कुछ दिन बीते के बाद कऊँआ के मन म पाप अमा जथे,अउ पेंड़ म कब्जा कर लेथे। चिड़िया मन ल पेंड़ म बइठे ल नई देवय। चिड़िया मन नान-नान रहैं,कऊंआ मेर सके नई सकिन। फेर सोचिन न्याय बर राजा मेर जाया जाय।




सब राजा मेर जाके फरियाद करिन अउ सब बात ल बताइन ।राजा ह कऊँआ ल बुलवाइस। सब्बो झन पेंड़ म अपन अधिकार बताय लगिन।

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राजा ह कथे कल तुंहर निरनय होही।फेर कऊँआ के मन म डर रहय के राजा  ह चिड़िया मन ल पेंड़ ल मत देदै। कऊँआ ह राजा मेर अकेल्ला चुपेकन गिस अउ राजा ल कथे, राजा साहब फैसला ल मोर पक्ष म दे देतेव। राजा जोर से गुस्साइस अउ कहिस अइसे कहे के तोर हिम्मत कइसे होइच।




कऊँआ ल एक तरीका सूझिस ,काहे न राजा ल लालच दे जाय। फेर रुपया पैसा म तो बात नई बनय। कऊँआ सोंच के  राजा ल कथे- राजा साहब फैसला मोर पक्ष म आहि त मैं ह तोर पुरखा मन स्वर्ग म कइसे रहिथें तेखर दरशन करा देहुँ।



राजा ल लगिस मैं अपन पुरखा मन ल देखे ल पाहुं कहिके मान गे।



दूसरा दिन जब दरबार म सब आइन त राजा कथे जेन ह जल्दी कन ये मरकी ल पानी ले भर दिही ,पेंड़ ह ओखरे ए।चिड़िया मन मरकी ल भरे बर सुरु करिन।चिड़िया मन अपन नांनकन चोंच म पानी ल लावैं, अउ मरकी म डारै ।




ए कोती कऊंआ के बड़े चोंच रहय ।कऊंआ ह मरकी ल जल्दी भर डारिस।




राजा ह कऊंआ के पक्ष म न्याय सुना दिस।चिड़िया मन का करैं पेड़ ल छोड़ के चलदिन।




अब राजा ह वादा के मुताबिक कऊँआ ल कथे ,चल मोर पुरखा मन ल देखा।कऊँआ ह राजा ल दु- तीन दिन पुराना गोबर मेर लेके के गिस फेर गोबर ल पलट के कथे देख राजा साहब इही मन तोर पुरखा एं कहिके देखादिच।


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राजा गोबर ल देखिच त ओमा किरा मन बजबजात रहै।कऊँआ कथे, राजा साहब ये बड़े असन दिखत हे तेन ह तोर  बाबुदद (दादा) ए।




राजा ए घटना ल कोनो ल नई बात सकीच फेर अपन करनी म बहुत पसताइच।






इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि लोग जिससे न्याय की उम्मीद रखते हैं और ओ ही लालची हो जाये तो किस्से न्याय की उम्मीद करें।जो सच जान कर भी पक्षपात करते हैं उनको जरूर इसका परिणाम मिलता है ।इस लिए लालच में आकर किसी का भी अहित नहीं करना चाहिए।




दोस्तों कहानी में किसी भी प्रकार की सुधार की आवश्यकता हो तो कमेंट के द्वारा अवश्य अवगत कराना।यदि कहानी  आपको अच्छा लगा है तो शेयर करना न भूलें।धन्यवाद





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