बाल कविता-किसान।baal kavita-kisan.


बाल मनोविज्ञान के अनुसार बाल कविता बच्चों के भाषाई कौशल के विकास के लिए महत्वपूर्ण होता है। बाल कविता ,कहानी बच्चों के लिए पाठ्यपुस्तक के अतिरिक्त ऐसी कई जानकारियां उपलब्ध कराती है जो मनोरंजक होने के साथ साथ ज्ञानवर्धक भी होता है।

 पाठ्यपुस्तक में दिए अभ्यास को बच्चा जब पूर्ण करता है और प्रतिदिन एक ही पाठ्यपुस्तक से उबने लगता है। सीखने की प्रक्रिया जब बोझिल लगने लगता है तब बच्चा कुछ नया चाहता है।

बाल कविता बच्चों के आसपास के घटनाओं से सम्बंधित होने के कारण उनको सरल लगता है रँगीन चित्र बच्चो को आकर्षित करता ही है साथ ही साथ उनके तर्क करने की क्षमता को बढ़ाता है।


बाल कविताएँ नए बच्चों को शाला से जोड़ने के लिए बहुत ही कारगर होता है। बच्चा जब हाव-भाव के साथ कविता को सुनकर दुहराता है तब धीरे धीरे उसके मन से शाला के प्रति जो भय होता है वह दूर होने लगता है।


यह एक छोटा सा प्रयास हो सकता है आपके शैक्षणिक  क्रियाकलाप को और रुचिकर बना दे।प्रस्तुत बाल कविता -किसान।




                         किसान

है किसान सबका मितान,जीना सबको सीखलाता है।
भूखें न रहे इस देश के वासी, करके अनाज ये उगाता है।



मेहनत करता कड़ी धूप में ,तर-तर पसीना गिराता है।
पानी गिरे या चले हों आंधी,चैन कहाँ फिर पाता है।।
रूखा-सूखा खाना खाए, कभी न हम को जताता है......

भूखें न रहे…..........................…........ये उगाता है।।

है किसान सबका मितान ,जीना सबको  सीखलाता है।
भूखें न रहे इस देश के वासी ,करके अनाज ये उगाता है।।








सीमित साधन,सन्तोष से जीना,सदा इनको ही भाता है।
देश,समाज सबका विकास,इनसे ही बढ़ता जाता है।।
भारत के गौरव संस्कृति ,इनके ही गुण को गाता है.......


भूखें न रहे  ...............................ये उगाता है।।

हैं किसान सबका मितान ,जीना सबको सीखलाता है।
भूखें न रहे इस देश के वासी, करके अनाज ये उगाता 
है।।





धरती माँ के लाडला बेटा,इस माँ का कर्ज चुकाता है।
गॉव की गलि,धान की बाली,देख इसे मुस्काता है।
थक कर जब बैठे पेड़ों तर,कितना सुकून पहुंचाता है..........


,भूखे न रहे.............................................उगाता है।

है किसान सबका मितान,जीना सबको  सीखलाता है।
भूखें न रहे इस देश के वासी ,करके अनाज ये उगाता है।।




गाय-बैल,भेड़-बकरी से,घर परिवार का नाता है।

मिलकर रहते साथ सभी, बन्धन इनका निराला है।।

चमक-दमक से रहते दूर हैं, फिर भी रंग भर आता .....


भूखें न रहे................................अनाज ये उगाता है।




है किसान सबका मितान,जीना सबको सीखलाता है।
भूखें न रहे इस देश के वासी,करके अनाज ये उगाता है।।






दोस्तों यह बाल कविता बच्चों के भाषाई कौशल के विकास में किस प्रकार मददगार हो सकता है, कमेंट के माध्यम से अपना अमूल्य सुझाव देकर जरूर अवगत कराना क्योकि आप लोगों  का सुझाव हमें नई ऊर्जा प्रदान करती है और हम कुछ नया करने का प्रयास करते हैं।

बाल कविता-किसान को शेयर करना न भूलना ।धन्यवाद दोस्तों


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