छत्तीसगढ़ी कहानी-हिजगा। chhattisgarhi kahani-hijagaa - हमर गांव

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Wednesday, 24 October 2018

छत्तीसगढ़ी कहानी-हिजगा। chhattisgarhi kahani-hijagaa







छत्तीसगढ़ राज सबले अलग राज हे। इहाँ के रहइया मनखे मन अड़बड़ सिधवा होथें।पहुना मन इहाँ भगवान के रूप माने जाथें।जेन इहाँ आथे इंखरे हो के रही जथे।छत्तीसगढ़ी बोली-भाखा ह सब के मन ल मोह लेथे काबर के छत्तीसगढ़ी बोली ह सब बोली भाषा ले अलग हे।छत्तीसगढ़ी बोली म भाव बहुत झलकथे एखरे सेती छत्तीसगढ़ी ह सब झन ल रिझाथे।


छत्तीसगढ़ी बोली के भाव ल समझना हे त छत्तीसगढ़ी म कहानी (किस्सा) जरूर सुनौ काबर कहानी म ओ बोली-भाषा के जम्मो गुण ह झलकथे।आप मन जेन कहानी ल पढ़े बर सुरु करइया हौव ,ओ कहानी ह दू भाई के सोंच अउ पश्चाताप के कहानी ए ।

ये कहानी ल पढ़े बर शुरू करहु ओखर पहली मोर एक ही निवेदन हवय,के कहानी ल पूरा पढ़िहौ तभेच ये कहानी के संदेश ह समझ म आही। त लेवा छत्तीसगढ़ी कहानी-'हिजगा'प्रस्तुत हे-


                         हिजगा


एक गॉव म दु भाई रहयं।दुनों भाई बढ़िहा मिलजुल के रहयं,काबर के उंखर दाई-दद नई रहय।कुछ दिन के बाद बड़े भाई के शादी जथे।अब भउजी-भइया अउ छोटे भाई तीनों झन बढ़िहा मिल के रहिथें ,फेर धीरे-धीरे भउजी ह हिजगा करे लगथे,अउ अपन पति ल तको अपन देवर बर भड़काय सगथे।



रोज-रोज जंगल म मर-मर के लकड़ी काट के लाथस अउ तोर भाई ह खा-पी के घुमत रहिथे।रोज के कहई-कहई म बड़े भाई ल तको लगे लगथे के महि भर कमाथौं अउ ए ह खाथे अउ घूमथे।अब तो बड़े भाई ह छोटे भाई ल तको जंगल जाय ब कहे लगिस।छोटे भाई ह अपन भइया ल जंगल जाय बर मना कर देवय।

बाई के भड़कई अउ छोटे भाई के मना करई म बड़े भाई ल बहुत गुस्सा आ जथे अउ अपन छोटे भाई ल जान से मारे बर सोंच लेथे।

एक दिन बड़े भाई ह अपन छोटे भाई ल कथे, चल तो जंगल म थोर कन झिटी काटे हौं, तेला ले के आ जबे।छोटे भाई ह रोज मना करै तइसे ओहु दिन मना कर देथे।तभो ले बड़े भाई ह जिधिया के ले जथे अउ रसता म नरवा पड़थे तेमा ढकेल देथे,अउ मरगे होहय कहिके जंगल चल देथे ।जंगल ले लकड़ी ले के घर आ जथे।ओखर बाई पूछथे त जम्मो बात ल बता देथे।


ए कोति बड़े भाई के ढकेले के बाद छोटे भाई ह गीरत-गीरत नीचे खाई म आ जथे।कुछ देर के बाद जब होंस आथे त उठ के देखथे।कुछ दुरिहा म जंगल के जानवर मन के बइठक चलत रहिथे।

बइठक म शेर ह कथे मोर ए टँगीया ल देखत हौ ए अइसे टँगीया ए, जेमा पूरा जंगल ल उजाड़े जा सकत हे।ओतका म बेंदरा ह कहिथे ए पेंड़ ल तो देखौ एखर छाली ल कइसनो के घांव म लगाय ले मिनटो म ठीक हो जथे।बेंदरा ह अपन बात ल जइसे खतम करथे ।कोलिहा ह एक बीजा निकालथे अउ कथे, ए बीजा ल देखत हौ,ए बीजा ल बोंहौ त तीन ठन फर फरही। पहिली फर म खाय के रइही,दूसर म सोना-चांदी अउ तीसर फर म पानी रइही।




लड़का ह उंखर सब बात ल धियान से सुनत रथे।सुने के बाद जइसे सब जीव पानी पिये बर नदिया म जाथैं,ओतका म ओ लड़का ह टँगीया म पेंड ल छोल के अपन घांव म लगा लेथे।सब ठीक हो जथे, फेर उही जंगल म छोटे कन कुटिया बनाके बीजा ल बों देथे।कुछ दिन के बाद ओमा तीन ठन फर लगथे।लड़का ह ओमा के सोना-चांदी ल बेचथे। खाय के अउ पानी वाले फर ल रख लेथे।


धीरे-धीरे लड़का ह बड़े आदमी बन जथे।जेन जघा म कुटिया रहय तेन ह आलीशान महल बना लेथे।नौकर-चाकर सब हो जथे।

एक दिन लड़का ह घर म भंडारा रखथे ।भंडारा म आस-पास के गॉव के आदमी मन खाय बर आय रथें।उंखर संग म ओखर भइया अउ भउजी तको आय रथें।लड़का ह अपन भइया अउ भउजी ल पहिचान जथे।दुनों ल उठा के अपन भीतर घर म बइठाथे।ए सब ल देख के ओखर भइया-भउजी मन पूंछथैं ,तैं कोन अच तलड़का ह बताथे के मैं तोर छोटे भाई आंव।



अपन भाई ल देख के ओखर भइया ह खूब रोथे अउ अपन करनी म बहुत पछताथें।बड़े भाई ह हाथ जोर के कथे,बाई के बात म आ के मैं पाप कर डरे रहेंव मोला माफी दे दे भाई।भउजी तको रो-रो के माफी माँगथे। छोटे भाई ह माफी दे देथे फेर सबोझन खुशी-खुशी जीवन बिताथें।



इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि अपने स्वार्थ के लिए बार-बार किसी का बुराई नही करना चाहिए क्योंकि बार-बार किसी का किसी से बुराई करने पर उस व्यक्ति के प्रति घृणा का भाव उत्पन्न होने लगता है और कभी-कभी ऐसी घटना घट जाती है जैसा कभी भी नही होना चाहिए।


दोस्तों यह शिक्षाप्रद कहानी पसन्द आ हो तो शेयर जरूर करना।यह कहानी कैसा लगा कमेंट के माध्यम से हमें जरूर अवगत कराना क्योकिं आप लोगों के द्वारा जो कमेंट मिलता है उससे हमारा मनोबल बढ़ता है और हम नए-नए कविता ,कहानी लिखने का प्रयास करते हैं।धन्यवाद



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