छत्तीसगढ़ी पकवान। chhattisgarhi pakvan - हमर गांव

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Thursday, 8 November 2018

छत्तीसगढ़ी पकवान। chhattisgarhi pakvan




हमारे देश के लगभग सभी राज्यों में रहन-सहन,वेश-भूषा तथा खान-पान में भिन्नता जरूर दिखाई देती है ।खान-पान में तो सभी राज्यों में भिन्नता है ही क्योंकि हर एक राज्य में कम से कम दस प्रकार का स्थानी व्यंजन देखने को जरूर मिलता हैं। कहीं बर्फी,कहीं पेड़ा,कहीं ढ़ोकला-फाफड़ा आदि आदि ।

इन सब राज्यों में एक राज्य है छत्तीसगढ़ ।यहाँ का पकवान राष्ट्रीय ही नही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुका है।छत्तीसगढ़ में जो भी पकवान बनाये जाते हैं,ये सभी पकवान पारम्परिक है। यहां आदिवासी क्षेत्रों से लेकर मैदानी क्षेत्रों तक सभी जगह आपको ये पकवान आसानी से मिल जाएंगे।छत्तीसगढ़ में जो भी व्यंजन बनाए जाते हैं वह किसी विशेष मौकों पर बनाए जाते हैं।जैसे-त्यौहार, शादी,मृत्युभोज आदि। छत्तीसगढ़ के कुछ व्यंजन के बारे में हम इस पोस्ट में बताने वाले हैं ।आप लोगों से एक ही निवेदन है कि इस पोस्ट अंत जरूर पढ़ें।



1.ठेठरी-
            छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में जो व्यंंजन बहुत प्रसिद्ध है,उसका नाम है ठेठरी।ठेठरी को बेसन से बनाया जाता है। आवश्यकतानुसार बेसन लिया जाता है फिर उसमें पानी डालकर गूंथा जाता है।स्वाद के लिए थोड़ा नमक और अजवायन डाला जाता है।फिर छोटे-छोटे लोई में तोड़कर चौकी या किसी सपाट स्थान में रखकर हथेली की सहायता से लम्बा रस्सी जैसे बेल लिया जाता है।बेेलने के बाद आधे हिस्से से मोड़ लिया जाता है फिर पुनःअंडे की आकृृति मेंं मोड़ लिया जाता है।

फिर तेल से छानकर निकाल लिया जाता है। इस प्रकार ठेठरी खाने के लिए बन कर तैयार हो जाता है। ।यदि ठेठरी बनाने में किसी प्रकार की कठिनाई महसूस होती है तो आप कमेंट बॉक्स में अपना सवाल लिख सकते हैं हम शिघ्र ही जवाब देने का प्रयास करेंगे।


2.चीला-
            चीला रोटी को दो विधि से बनाया जाता है।पहला विधि, जिसमे चीला रोटी को तवा में बनाया जाता है।इस विधि में कटोरी के सहायता से आटा के घोल को तवा में डाला जाता है फिर उसी कटोरे की मदद से आटे के घोल को तवा में फैलाया जाता है और प्लेट आदि से ढक दिया जाता है जिससे भाप की मदद से रोटी बन जाता है।दूसरा विधि ,जिसमें चीला रोटी को कड़ाही में तेल से छान कर बनाया जाता है।तेल से छान कर जो चीला रोटी बनाया जाता है।उसमें भी बनाने के दो तरीके हैं, नमक वाला और गुण वाला।



चीला रोटी को बनाने के लिए चावल आटे को घेरादार बर्तन में घोला जाता है।चीला रोटी बनाने के लिए आटा को डोसा के जितना ही घोला जाता है।

3.खुरमी-
           खुरमी बनाने के लिए खुरदरा पिसा हुआ, गेहूं और आवल के आटे को बराबर मात्रा में लिया जाता है। आटे में नारियल का छोटा-छोटा टूकड़ा,थोड़ा तील,फल्ली दाना,इलायची,लौंग और थोड़ा घी डाल कर कड़ा गूँथा जाता है।गूँथने के बाद मुट्ठी से दबा-दबाकर खुरमी को बनाया जाता है। चाहें तो कुछ समय के लिए धूप में सुखा सकते हैैं फिर तेल से छान लिया जाता है इस प्रकार खुरमी बन कर तैयार हो जाता है।


4.करी-
         छत्तीसगढ़ में करी, शादी या मृत्युभोज में खिलाने के लिए बनाया जाता है। बेसन को पानी डाल कर गूँथा जाता है।आटे को थोड़ा नरम गूँथा जाता है।गूँथने के बाद साचें की मदद से गर्म तेल में गारा जाता है,फिर छान लिया जाता है। गुण का चासनी बनाकर करी का लड्डू बना लिया जाता है।


5.फरा-

         फरा चावल आटे का बनाया जाता है। चावल आटे को गर्म पानी से गूँथकर हाथ से दिया के बाती जैसा छोटा-छोटा बना लिया जाता है,फिर एक बर्तन में पानी भरकर चूल्हे में रखा जाता है और उसके ऊपर छेद वाले बर्तन में फरा को रखकर ढक दिया जाता है।फरा भाप में पककर तैयार हो जाता है। फरा भी दो तरीके से बनाया जाता है।गन्ने के रस वाला और मिर्ची और जीरे में बघार कर।


6.भजिया-
              भजिया को बेसन से बनाया जाता है।भजिया बनाने के लिए बेसन में थोड़ा नमक, प्याज या पालक या लालभाजी डालकर लसलसा घोला जाता है ।हाथ से छोटा-छोटा टुकड़ा करके गर्म तेल से छानकर निकाल लिया जाता है।


7.चौंसेला-

               चावल आटे को गर्म पानी मे भिगोकर गूँथा जाता है।कभी कभी बिना नमक के भी बनाया जाता है।छोटी-छोटी लोई बनाकर हाथ की सहायता से फैलाया जाता है।फिर तेल से छानकर निकाल लिया जाता है।


8.देहरौरी-

             चावल को भींगाकर छाया में सुखाया जाता है फिर ढेकी या मूसर की सहायता से कूटकर गर्म पानी डालकर गूँथा जाता है।घी डालकर मोयन किया जाता है फिर छोटी छोटी लोई बनाकर बरा जैसे फैलाया जाता है और तेल से छान लिया जाता है। बनने के बाद शक्कर या गुण का चासनी बनाकर डुबो दिया जाता है। देहरौरी रसगुल्ला का देशी रूप है।


9.बरा-

         रात में उड़द दाल को पानी में भिंगोकर रख दिया जाता है।सुबह पानी की सहायता से छिलके को निकाल लिया जाता है।फिर मशीन या सील की सहायता से पिसा जाता है।आवश्यकतानुसार हरा मिर्च,नमक डालकर तेल से छान लिया जाता है।छत्तीसगढ़ में उड़द से ही बरा बनाया जाता है।पर आज-कल बेसन में प्याज डाल होटल आदि में प्याजी बरा भी बनाने लगे हैं।हिंदी इसे ही बड़ा कहा जाता है।

10.खीर-
             छत्तीसगढ़ी पकवानों में खीर का भी बहुत महत्व है खीर को चावल में शक्कर,काजू,किशमिश, बादाम,और दूध डालकर बनाया जाता है।कभी-कभी गन्ने के रस से भी खीर बनाया जाता है।





इसके अतिरिक्त अइड़सा,पपची,बोबरा,कपूवा,मुरकू आदि पकवान भी बनाए जाते हैं दोस्तों आप लोगों को यह जानकारी उपयोगी लगे तो शेयर जरूर करना। यदि किसी भी पकवान के बारे में जानकारी अधूरी लगे या कोई सुधाव देना चाहें तो नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें।धन्यवाद जय छत्तीसगढ़

             
              
              

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