स्व-सहायता समूह के माध्यम से लोन प्राप्त करने की पूरी जानकारी।swa-sahayata samuh ke labh


हमारे देश में महिलाओं को सशक्त बनाने की बात हमेशा होती है और वर्तमान समय में सभी महिलाएँ आत्मनिर्भर बनना भी चाहती हैं।यह पोस्ट ऐसी महिलाओं के लिए ही है। क्या आप लोन लेना चाहती हैं,क्या आप आत्म निर्भर बनना चाहती हैं, तो अब आपको हतास होने की आवश्यकता नही है, बस आपको इस आर्टिकल को पूरा पढ़ना होगा।

तो चलिए जानते हैं आप किस योजना के अंतर्गत लोन ले सकती हैं और अपने लिए व्यवसाय शुरू कर आत्मनिर्भर बन सकती हैं।





भारत सरकार तथा राज्य सरकारें सभी गरीबी उन्मूलन एवं महिला सशक्तिकरण के दिशा में सतत प्रयास कर रहीं हैं। भारत सरकार का विकास मंत्रालय विभाग 'ग्रामीण आजीविका मिशन 'बिहान'(SRLM)'कार्यक्रम के अंतर्गत महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए विभिन्न प्रकार की योजनाएँ चला रही है।




छत्तीसगढ़ शासन द्वारा महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए भारत सरकार के विकास मंत्रालय विभाग ग्रामीण आजीविका मिशन'बिहान (SRLM)'कार्यक्रम के अंतर्गत महिला स्व-सहायता समूह को ऋण उपलब्ध कराती है।




स्व-सहायता समूह क्या है




स्व-सहायता समूह ग्रामीण गरीब परिवारों का पंजीकृत या अपंजीकृत समूह होता है।जो आपसी सहयोग से बचत करती हैं और व्यवसाय शुरू करने के लिए एक -दूसरे का मदद करती है।

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शासन के द्वारा भी इन समूहों को व्यवसाय शुरू करने के लिए ऋण प्रदान किया जाता है।




स्व-सहायता समूह योजना शुरू करने के उद्देश्य




👉इस योजना का मुख्य उद्देश्य विभिन्न प्रकार के रोजगार के अवसर सृजन कर ग्रामीण परिवारों की गरीबी दूर करना है।

👉हमारे देश के ग्रामीण क्षेत्रों में कोई भी गरीब परिवार जो छोटी से छोटी रोजगार शुरू करना चाहते हैं तो उसके सामने आर्थिक समस्या उत्पन्न हो जाती है।यदि कोई बैंक से लोन लेना भी चाहता है तो बैंक में जमानत के तौर पर रखने के लिए उसके पास कुछ भी नही होता है और लोन से वंचित हो जाता है।
👉यदि बैंक लोन दे भी देता है तो व्यक्तिगत तौर पर ऋण वसूली करने में बैंक को असुविधा होती है।इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखकर शासन के द्वारा स्व-सहायता समूह की कल्पना किया गया।
👉समूह में लोन लेने से बैंक में किसी प्रकार की जमानत के तौर पर देने के लिए चल-अचल सम्पत्ति की आवश्यकता नही पड़ती है।और बैंक का भी वसूली पूरा हो जाता है।



स्व-सहायता समूह का गठन व पंजीयन


स्व-सहायता समूह का गठन करने के लिए 10 से 20 सदस्य का  होना आवश्यक है यदि सदस्य संख्या 20 से अधिक है तो उस स्थिति में समूह का पंजीकरण होना जरूरी है।इसके लिए जिला स्तर पर सहायक पंजीयक कार्यालय में जाकर पंजीयन करा सकते हैं।  20 से अधिक सदस्य होने पर बैंक बिना पंजीयन के ऋण नही देगा। 10-20 की संख्या वाले स्व-सहायता समूह का पंजीयन आवश्यक नही होता है।

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इस सम्बंध में अधिक जानकारी के लिए आप अपने क्षेत्र के A.D.E.O. से सम्पर्क कर सकते हैं,क्योंकि बैंक लिंकेज से सम्बंधित सभी कार्यों में ADEO पूरा मदद करता है ।

स्व-सहायता समूह के लिए योजना



स्व-सहायता समूह के लिए शासन द्वारा कई प्रकार की योजनाएँ चलाई जा रही है-दाल-भात केंद्र का संचालन,मध्यान्ह भोजन का कार्य,उचित मूल्य दुकान का संचालन,मछली पालन हेतु तालाब का पट्टा,सब्जी की खेती आदि।






बैंक लिंकेज-




महिला स्व-सहायता समूहों को स्वरोजगार स्थापना हेतु बैंकों  से जोड़ना योजना का प्रमुख लक्ष्य है।इसके अंतर्गत महिला स्व-सहायता समूहों को  6-7वर्षों तक रिपीट लोन के माध्यम से ऋण उपलब्ध कराया जाता है।

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इस योजना के अंतर्गत स्व-सहायता समूहों को 3℅व्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराया जाता है।स्व-सहायता समूह को समयावधि में ऋण को चुकाना आवश्यक होता है।





आवश्यक शर्तें




यदि स्व-सहायता समूह के माध्यम से ऋण लेना चाहते हैं तो स्व-सहायता समूह के द्वारा कुछ शर्तों को पूरा करना जरूरी है।समूह के गठन को 6 माह होना जरूरी है।समूह का नियमित बैठक होना चाहिए।समूह का बचत खाता हो और खाते में बचत किए गए राशि का होना भी जरूरी है।


इस प्रकार आप स्व-सहायता समूह के माध्यम से बैंक से ऋण प्राप्त कर अपने लिए व्यवसाय शुरू कर सकते हैं।दोस्तों इस आर्टिकल को अधिक से अधिक शेयर जरूर करें।यदि आपके मन मे इस योजना के बारे में किसी भी प्रकार का सवाल या सुझाव हो तो नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर कमेंट करें।धन्यवाद







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