छत्तीसगढ़ी कहानी-नाम बड़े के काम।Chhattisgarhi kahani nam bade ke kam - हमर गांव

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Saturday, 21 April 2018

छत्तीसगढ़ी कहानी-नाम बड़े के काम।Chhattisgarhi kahani nam bade ke kam

आज हर एक इंसान वर्तमान के चकाचौंध और फैशन के चक्कर मे अपना सब कुछ बदल कर रख दिये हैं।लोग ऐसे चीजों का यूज़ करते हैं जिसे देख कर लोग उसका तारीफ करें।ओ ऐसे चीजें कतई नही रखना चाहता जिससे उसे लोगों का ताना सुन्ना पड़े या हंसी का पात्र बनना पड़े।इस कहानी में माध्यम से यह बताने का प्रयास किया गया है कि काम ही श्रेष्ठ है।




                    नाम बड़े के काम


एक गॉव म एक आदमी रहय ओ मन पति पत्नी दुनो संग म रहय ।ओ आदमी के नाम रहय बुद्धू।


बुद्धू के पत्नी जब जब कुआँ म पानी भरे ल जाय गॉव के अउ महिला मन ओखर पति के नाव ले के ओखर खूब हसीं उड़वावय कि ओ दे बुद्धू के बाई आवत हे।


ओला बहुत खराब लागय ।ओ ह घर म आ के अपन पति मेर जम्मो बात ल बतावय अउ अपन पति ल नाव बदले बर बार बार कहय।


ओखर पति ओला बहुत समझावय के आदमी के नाव ले कुछू नई होवय ओखर काम सही होना चाही।आदमी अपन काम से महान बनथे नाव से नही।

बुद्धू के पत्नी कुछ दिन तक ताना ल सहिच फेर एक दिन गुस्सा म अपन पति ल कहिथे जब तक अपन नाव ल नई बदलबे तब तक मैं घर म नई रहौं ,छोड़ के मइके जाथौं।



बेचारा थक हार के कहिथे जा तहिं ह  नाव खोज के आबे ।फेर नाव ल बदलहुँ ओखर पत्नी ह  नाव खोजे बर निकलगे ।


जात रहय त रस्ता म एक गांव पड़िच उहां दु आदमी रहय जेमा एक ह बहुत खुश रहय अउ एक ह बहुत दुखी रहय।आस पास के आदमी मन ल पूछिस इंखर  का नाव हे भईया हो। ओमन बताईन के जो दुखी के तेख नाव सुखी राम अउ जेन खुश हे तेखर नाव दुखी राम हे।


अउ आघू बढ़गे फेर एक जघा पानी पिये बर रुकीच अउ एक आदमी ल कथे भईया पानी होही त दे देतेव पियास लागत हे। ओ आदमी अपन नौकर ल कथे ए अमीरचंद एला पानी दे देते।नाव ल सुनते ही बुद्धू के बाई पूछथे तोर का नाव हे बब ओ आदमी कथे मोर नाव गरीब दास हे।


ओहू मेर ले आघू बढ़ जाथे रस्ता म जात रथे त देखथे कि एक आदमी ह दूसर आदमी ल कुछ समझात रथे।बुद्धू के बाई उमन ल पूछथे तुंहर का का नाव हे भईया।जेन समझात रथे तेन ह कथे मोर नाव भोंंदु अउ एखर नाव ज्ञानी हे।


एतका बात ल सुनथे त बुद्धू के बाई के आँखि खुल जाथे।मन म कथे नाव से कुछू नई होय काम अच्छा होना चाही अउ नाव खोजई ल छोड़ के  लहुट के घर आ जथे।

घर आथे त ओखर पति पूछथे कइसे नवा नाव मिलिस हे।पत्नी के आखीं म आंसू आ जथे अउ पति के पाव ल पकड़ लेथे।पति समझ जथे प्यार से उठाथे ।



ईसे भी पढ़ें-धोबी के कुकुर न घर के न घाट के www.hamargaon.com पर।



इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि लोग अपने कर्म से महान बनते है  नाम से नही।

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