aloe vera ki kheti kaise hoti hai एलोवेरा की खेती कैसे करें , सालाना 10 लाख तक इनकम

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किसान भाइयों नमस्कार, खेती किसानी से जुड़ी एक नई जानकारी के साथ एक बार पुनः आपका हमारे वेबसाइट hamargaon.com  में स्वागत है। किसान भाइयों आज हम एलोवेरा (घृतकुमारी) की खेती से जुड़ी कुछ खास बातें हैं आपसे साझा करेंगे , जिससे मदद से आप एलोवेरा की खेती करके साल भर अच्छा खासा इनकम प्राप्त कर सकते हैं।

एलोवेरा एक ऐसी फसल है जिसकी मांग बाजार में पूरे साल भर बना रहता है। जो किसान भाई इस खेती को अपना लेता है, उसका इनकम कई गुना तक बढ़ सकता है। एलोवेरा की खेती के लिए आपको किसी प्रकार की विशेष तैयारी की आवश्यकता नहीं है, इसके लिए आपको ज्यादा मशक्कत नहीं करना पड़ेगा।

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एलोवेरा या ग्वारपाठा की खेती से साल भर इनकम-

एलोवेरा को ग्वारपाठा भी कहते हैं। एलोवेरा को सिंचित और असिंचित दोनों अवस्थाओं में भी उगाया जा सकता है। एलोवेरा का लसलसा गुदा ही काम का होता है। इसी से जूस तथा अन्य उत्पाद तैयार किए जाते हैं। एलोवेरा बहुत ही उपयोगी पौधा है, इसलिए इससे जुड़े उत्पाद की मांग मार्केट में पूरे साल भर बनी रहती है।

एलोवेरा की खेती में आने वाला खर्च-

इंडियन काउंसिल फॉर एग्रीकल्चर रिसर्च( आईसीएआर) के अनुसार 1 हेक्टेयर में प्लांटेशन का खर्च लगभग 27000 से 28000 रुपए  तक आता है। यदि मजदूरी, खेत तैयार करने, खाद आदि को जोड़ें तो पहले साल लगभग ₹50000 तक खर्च पहुंच जाता है, चूँकि एक बार लगाने के बाद 3 से 4 साल तक उत्पादन होते रहता है, इसलिए यह खर्च ज्यादा नहीं कहा जा सकता।

एलोवेरा की आदर्श खेती -

एलोवेरा के कंदो को ही बरसात के सीजन में लगाया जाता है। जुलाई से अगस्त माह में लगाना उचित रहता है। पौधों और कतारों के बीच 1-1 मीटर का फासला रखते हैं। यदि आदर्श कृषि की बात करें तो एक हेक्टेयर में लगभग 40000 पौधे रोपे जा सकते हैं। एलोवेरा की खेती में सिंचाई करने से जेल अधिक मात्रा में मिलती है।

एलोवेरा का बीज (कंद )-

एलोवेरा की बीज की बात करें तो एलोवेरा के कंद उगाया जाता है ।  एलोईन तथा जेल उत्पादन की दृष्टि से नेशनल ब्यूरो ऑफ प्लांट जेनेटिक सोर्सेस द्वारा  घृतकुमारी की नई किस्में विकसित की गई है। वाणिज्य खेती के लिए जिन किसानों ने पूर्व में  घृतकुमारी की खेती की हो तथा जेल या जूस आदि का उत्पादन में पत्तियों का उपयोग कर रहे हो संपर्क करना चाहिए।

एलोवेरा की खेती की देखभाल-

एलोवेरा की खेती के लिए विशेष देखभाल की आवश्यकता नहीं है परंतु ऐसा भी नहीं है कि आप फसल लगाने के बाद उसे ऐसे ही छोड़ दें। एलोवेरा की खेती में विशेष सावधानी सिंचाई से संबंधित रखना होता है क्योंकि अधिक मात्रा में सिंचाई करने से इसकी जड़ें सड़ जाती हैं और पौधे मर  जाते हैं।

इसकी सिंचाई करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए,  कि सतह से लगभग दो-तीन इंच नीचे तक मिट्टी सूख न जाए तब तक उसमें पानी डालें। सामान्य मौसम में सप्ताह में एक बार तथा सर्दियों के मौसम में इससे कम पानी देना इसके लिए अच्छा रहता है।

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एक बार खेती 2 से 3 सालों तक इनकम-

एलोवेरा बहुत ही उपयोगी  पौधा होने के साथ-साथ  खेती की दृष्टि से किसानों के लिए बहुत ही आसान फसल की श्रेणी में आता है, एलोवेरा की खेती की खास बात यह है कि एक बार एलोवेरा की फसल लगाने के बाद 3 से 4 साल तक इससे  इनकम प्राप्त किया जा सकता है, क्योंकि इसमें 4 से 5 साल तक पत्तियां आती रहती है जिससे किसानों को बार-बार कंदों को लगाने की जरूरत नहीं पड़ती।

प्रसंस्करण तथा उत्पाद से इनकम में करें बढ़ोतरी-

किसान भाइयों एलोवेरा की खेती करने का एक फायदा और है। आप एलोवेरा का प्रसंस्करण और उत्पाद तैयार कर अपनी इनकम में कई गुना बढ़ोतरी कर सकते हैं। यदि आप प्रसंस्करण करना शुरू कर देते हैं तो आपका इनकम कई गुना तक बढ़ सकता है, कई किसान ऐसे हैं जो  दूसरे किसानों से एलोवेरा खरीद कर अपना संस्करण कर रहे हैं और कई तरह के उत्पाद तैयार कर रहे हैं।

एलोवेरा को प्रसंस्करण के दौरान पोटेशियम में डालकर गर्म पानी से धोया जाता है उसके पश्चात उसका टुकड़ा किया जाता है टुकड़े को गर्म पानी में डाला जाता है,और उसके कुछ समय पश्चात एलोवेरा से जेल को निकाल लिया जाता है। उसके पश्चात जेल को ग्रेंडर मशीन में डाला जाता है और उसका जूस तैयार किया जाता है।

जूस को फिर 70 डिग्री सेल्सियस तापमान में गर्म किया जाता है और उसके पश्चात उसे छानकर प्रिजर्वेटिव मिलाया जाता है। इसके पश्चात फ्रीजर में रख दिया जाता है इस तरह जगह या उत्पाद बनकर तैयार हो जाता है। इसके पश्चात इसका इस्तेमाल सौंदर्य  से जुड़ी उत्पादों और दवा बनाने में किया जाता है।

किसान भाइयों जैसा कि आपको पता है केवल प्रसंस्करण तैयार करना और और उत्पाद तैयार करना ही पर्याप्त नहीं है इसके लिए एक अच्छे मार्केटिंग की आवश्यकता पड़ती है,क्योंकि इनकम बढ़ाने के लिए एक अच्छा मार्केटिंग का होना आवश्यक है।

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